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Headquarters Udaipur, Rajasthan
Address Navlakha Mahal, Gulab Bagh Road, Udaipur 313002
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Discover the
Legacy of
Ancient Indian Wisdom

The sacred place where Maharishi Dayanand Saraswati Ji completed the timeless masterpiece “Satyarth Prakash”.

150+

Years of Legacy

1M+

Visitors Inspired

Vedic

Knowledge Centre

About

Satyarth Prakash Nyas

Navalakha Mahal is situated in the heart of a blooming rose garden (Gulab Bag) which was originally laid out in the nineteenth century in the historical city of Udaipur also known as the “City of Lakes”.

Vedic Heritage

Cultural Preservation

Educational Activities

Spiritual Research

Aarya Samaj

About Arya Samaj

Arya Samaj, founded by Swami Dayanand Saraswati on April 10, 1875 in Bombay (now Mumbai), is a social reform movement. Contrary to some misconceptions, it is not a religion or a new sect in Hindu religion. Swami Dayanand brought together a number of concerned members of the society to eliminate the ills prevalent within the Hindu Society in the 19th century.

What You Can Explore

Satyarth Prakash Stambh

14 Chapters of
Eternal Knowledge

A symbolic monument representing the 14
chapters of Satyarth Prakash – the eternal guide
for humanity.

दीनदयाल सुरेशचंद्र आर्य संस्कार वीथिका

नवलखा महल, उदयपुर में, विश्व प्रसिद्ध आर्यावर्त चित्रदीर्घा पहले से ही सहस्त्रो जनो को प्रतिवर्ष आकर्षित कर रही है| इसी को विस्तार देने हेतु एक ३डी थियेटर (सर्वोत्कृष्ट क्वालिटी में ) तैयार किया जा रहा है | जिसमे छात्रपयोगी लघु फिल्मे दिखाई जाएँगी | संस्कार वीथिका के बारे में हमारा निवेदन है की महर्षि दयानन्द सरस्वती ने भारतीय मनीषा को पुनजीर्वित करते हुए ‘मानव तू मानव बन’ को साकार करने हेतु 16 संस्कारों से युक्त ‘मानव निर्माण पद्धति’ हमें ‘संस्कार विधि’ के रूप में प्रदान की है |

Navlakha Mahal

Navlakha Mahal at a Glance

नवलखा महल केवल एक ऐतिहासिक भवन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान, राष्ट्र चेतना और महर्षि दयानन्द सरस्वती की अमर स्मृतियों का पावन केन्द्र है।

नवलखा महल की यात्रा से जुड़े प्रमुख व्यक्ति

महर्षि दयानन्द सरस्वती

19वीं सदी के इस महान विचारक, वेदों के व्याख्याता और युगप्रवर्तक ने नवलखा महल में लगभग साढ़े छह माह तक प्रवास किया था। इसी पावन स्थल पर उन्होंने अपनी कालजयी कृति 'सत्यार्थ प्रकाश' के प्रामाणिक संस्करण का सृजन किया तथा 'श्रीमती परोपकारिणी सभा' का गठन किया।

महाराणा सज्जन सिंह जी

मेवाड़ के इन नरेश ने महर्षि दयानन्द जी को सादर उदयपुर आमंत्रित कर नवलखा महल में ठहराया था। महर्षि के सान्निध्य में आकर उन्होंने अपने आहार-विहार, स्वभाव और दिनचर्या में आमूलचूल परिवर्तन किया तथा वे एक प्रकार से उनके शिष्य बन गए थे।

स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती

पूर्व नाम श्री हनुमान प्रसाद चौधरी। इन्होंने इस जीर्ण-शीर्ण भवन के जीर्णोद्धार का महान संकल्प लिया और अपनी तपस्या से इसका कायाकल्प कर दिया। वे श्रीमद्दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के आजीवन अध्यक्ष बने तथा यहीं 1998 में एक भव्य यज्ञशाला का निर्माण करवाकर संन्यास आश्रम में दीक्षित हुए।

स्वामी सुमेधानन्द जी सरस्वती

राजस्थान आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्कालीन मंत्री, जिनकी महती प्रेरणा और अथक प्रयासों के फलस्वरूप यह पावन भवन आर्य समाज को प्राप्त हो सका।

माननीय श्री भैरोसिंह जी शेखावत

राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री, जिनके ऐतिहासिक और दिव्य अनुदान से आर्यों को यह भवन सौंपा गया।

नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र

आकर्षक बाह्य दृश्य

भवन के बाह्य भाग को जोधपुर के पत्थर की सुंदर नक्काशी से सजाया गया है। दरवाजों पर हाई रिलीफ म्यूरल आर्ट के माध्यम से महर्षि अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा के नयनाभिराम प्रदर्श तथा वेदों के छह मंत्रों को दृश्यमान स्वरूप दिया गया है।

मधु-हरि प्रेरणा कक्ष

यह एक अत्यंत मनोहारी स्वागत कक्ष है जिसकी एक भित्ति पर पंच महायज्ञों को उकेरा गया है। इसी कक्ष में 'राष्ट्रोन्नायक वीथिका' के अंतर्गत भारत को समुन्नत करने वाले लगभग 70 राष्ट्रनायकों के चित्र सुसज्जित हैं।

आर्यावर्त चित्रदीर्घा

इस दीर्घा में वेद ज्ञान को उद्घाटित करने वाले ऋषियों के चित्रों के साथ-साथ भगवान श्री राम और श्री कृष्ण के उदात्त जीवन की आदर्श झाँकियाँ प्रस्तुत की गई हैं।

मेवाड़ दर्शन

वीर प्रसू मेवाड़ धरा और विशेष रूप से महाराणा प्रताप के जीवन को समर्पित इस दीर्घा में मनोहारी ऑयल पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं।

आर्यरत्न दीर्घा

इस दीर्घा में उन महान आर्य पुरुषों का जीवन चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है जिन्होंने महर्षि दयानन्द के मन्तव्यों का प्रचार-प्रसार और पल्लवन किया।

वेदार्थ प्रकाशक कक्ष

वेद मंत्रों की दिव्य शिक्षाओं को आमजन तक पहुँचाने के लिए यहाँ दृश्यात्मक रूप से वेदार्थ प्रस्तुत करने की योजना के तहत 20 चित्र बनाए जा रहे हैं।

नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के भव्य प्रकल्प

सत्यार्थ प्रकाश के अनुवाद

यहाँ एक घूमने वाले रैक में विश्व की 24 भाषाओं में अनूदित सत्यार्थ प्रकाश का एक-एक पृष्ठ प्रदर्शित किया गया है, ताकि दर्शक एक ही स्थान पर इन सभी भाषाओं के अनुवाद देख सकें।

क्रान्ति कक्ष

मातृभूमि की स्वाधीनता की बलिवेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत के महान सपूतों और शूरवीरों को इस कक्ष में रेखांकित किया गया है।

सत्यार्थ प्रकाश रचना कक्ष

यह वही पुनीत कक्ष है जहाँ स्वामी जी लेखन व पठन-पाठन किया करते थे। यहाँ काँच का चौदह खण्डीय घूमता हुआ स्तम्भ बनाया गया है जिस पर सत्यार्थ प्रकाश की 112 शिक्षाएँ अंकित हैं।

सत्यार्थ प्रकाश चित्रावली

सत्यार्थ प्रकाश की शिक्षाओं को इस प्रकल्प में चित्रात्मक रूप से प्रकाशित किया गया है ताकि दर्शक समग्र चिंतन की झलक पा सकें।

महर्षि दयानन्द जीवन दर्शन

56 सुंदर ऑयल पेंटिंग्स के माध्यम से ऋषिवर के महान व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके समग्र क्रान्ति के विचार का दिग्दर्शन कराया गया है।

अविद्या / कुरीति निवारण चित्रमाला

सृष्टिक्रम के विरुद्ध दंतकथाओं और कुरीतियों का तार्किक व सचित्र निवारण कर सत्य को स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

दीन दयाल-सुरेशचन्द्र आर्य संस्कार वीथिका

मानव जीवन को अभ्युदय की ओर ले जाने वाले सोलह संस्कारों को यहाँ फाइबर रेजिन के बोलते हुए पुतलों द्वारा दृश्य-श्रव्य विधि से अत्यंत सजीव रूप में व्याख्यायित किया गया है।

माता निर्माता भवति

10 ऑयल पेंटिंग्स के माध्यम से माता कौशल्या- श्रीराम, माता यशोदा-श्रीकृष्ण, माता जीजाबाई-शिवाजी, माता कुलवन्त बाई-महाराणा प्रताप आदि के उदाहरणों द्वारा संतान निर्माण में माता की सर्वोपरि भूमिका को सिद्ध किया गया है।

भारत गौरव दर्शन

यह प्रकल्प उड़ीसा के वीर बालक बाजा बरुआ जैसे अनेक अज्ञात क्रान्तिवीरों को समर्पित है। यहाँ एक टेलीविजन पर वर्ष के 365 दिनों में 365 क्रान्तिवीरों का उत्सर्ग दिखाया जाता है।

सुरेशचन्द्र-दीनदयाल आर्य चलचित्रालय

यह 34 सीटों की क्षमता वाला एक सुसज्जित 3-D थियेटर है। इसमें विद्यार्थियों और दर्शकों को महर्षि दयानन्द, स्वामी श्रद्धानन्द, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और आजादी से जुड़े ज्ञानवर्धक लघु चलचित्र दिखाए जाते हैं।

“नवलखा महल — जहाँ इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और राष्ट्र चेतना के रूप में अनुभव किया जाता है।”

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Visitor Testimonials

What Our Visitors Say About Us

मेरी उदयपुर की ये पहली विजिट थी। मुझे यहाँ (आयुर्वेद चित्रदीर्घा, नवलखा महल) आकर बहुत अच्छा लगा। मैं अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली समझता हूँ कि मुझे उस जगह आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जहाँ श्री स्वामी जी ने अपने सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ सर्वार्थ प्रकाश का प्रणयन किया।
सरवदेव सोनी
नवलखा महल में महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में अच्छी जानकारी मिली। इस महल में आकर हमें अनेक जानकारी प्राप्त हुई जो प्राचीन इतिहास से अवगत कराती है।
जीवराम मीणा
इस स्थान का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। इस जगह को देखने से यह पता चलता है कि हमारे भारत देश में भी दर्शन करने एवं घूमने वाली जगह बहुत अच्छी है। मैं भारतीय होने पर गर्व करता हूँ। यह जगह काफी सुंदर है।
मोती कुमार - बिहार
यह स्थान भारतीय संस्कृति और इतिहास का अद्भुत उदाहरण है। यहाँ आकर बहुत कुछ सीखने को मिला और दोबारा आने की इच्छा है।
रमेश शर्मा

    Office

    Shrimad Dayanand Satyarth Prakash Nyas, Navlakha Mahal, Inside Gulab Bagh, Gulab Bagh Road, Udaipur, 313002 (Rajasthan)